अंसगठित क्षेत्र में कार्यरत् बालश्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक अध्ययन

(दुर्ग शहर के विशेष संदर्भ मे)

 

सुनीता1, डॅा. बी.एल.सोनेकर2

1शोध छात्रा, अर्थशास्त्र अध्ययन शाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर

2सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययन शाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर

 

संक्षेप:-

शोध अध्ययन क्षेत्र दुर्ग शहर के अंसगठित क्षेत्र में कार्यरत बालश्रमिकांे के समाजिक एंव आर्थिक स्थिति पर केन्द्रित रखा है। संबंधित शोधों की समीक्षा  के पश्चात् शोध अध्ययन में परिकल्पना अंसगठित शहरीय क्षेत्र में कार्यरत् बाल श्रमिक अशिक्षित एवं उनके परिवारों की आय निम्न है। अध्ययन में निर्देशन के माध्यम से 320 बालश्रमिकों का चयन किया गया है। अध्ययन की प्रकृति प्राथमिक समकों पर आधारित है। जिसे अनुसूची के माध्यम से तथ्यों का संकलन किया गया है । अध्ययन में सर्वाधिक 57.19 प्रतिशत् बालश्रमिक 12-14 वर्ष के आयु के है। 50 प्रतिशत् बालश्रमिक अशिक्षित है जिसमें 36.25 प्रतिशत् प्राथमिक एवं 13.75 प्रतिशत् बालश्रमिक माध्यमिक शाला में पढ़ाई किये है। 66.56 प्रतिशत् बालश्रमिक कच्चे मकानों में रहते है 51.56 प्रतिशत् बालश्रमिकों को मासिक मजदूरी प्राप्त होता है। 39.69 प्रतिशत् बालश्रमिक 7-9 घण्टे काम करते है। बालश्रमिकों की औसत आय 698.35 रूपये है। तथा इनके परिवारों की औसत आय 1877.97 रूपये है। परिवारों की आय में बालश्रमिकों की भागीदारी 37.19 प्रतिशत् है।

 

प्रस्तावनाः-

बालश्रम एक अन्तर्राष्टीªय समस्या है। बालश्रम विश्व के चारांे ओर व्यापक रूप से फैला हुआ है। बालकों का शोषण मानव अधिकारांे का एक दुरूपयोग है। लाखों करोडों बच्चों को खतरनाक उद्योगों और अन्य व्यवसाय में नियोजित करके उनके स्वास्थय और कोमल भावनाओं की बलि दी जा रही है।

 

जिन्हे विद्यालयों में शिक्षा मिलनी चाहिए तथा अपने जीवन का आनंद मनोरंजन और खेल कूद के साथ लेना चाहिए वे एक छोटी सी पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए अस्वास्थ्य कर तथा अहितकर दशाओं में विभिन्न कार्यो में कार्य करते हुए पाये जाते है। (श्रीवास्तव मंयक 2008) अन्तर्राष्टीय श्रम संगठन ने 1919 में बाल श्रमिकांे की उम्र 14 वर्ष निधारित की 1922 में 15 वर्ष 1923 में इंडियन सांइस एक्ट के अनुसार इनकी आयु 13 वर्ष कर दिया गया भारत में न्यूनतम 14 वर्ष आयु के बालक को बालश्रम कहा जाता है। फैक्ट्री एक्ट के अनुसार इनकी आयु 18 वर्ष तक की गई है। (वाजपेयी डाॅ. दुर्गा 2009) जबकि किसी भी व्यवसाय, उद्योग, खान, कारखाना, आदि में 14 वर्ष से कम आयु के मानसिक व शारीरिक  श्रम   करने वाले बच्चंे बाल श्रमिक है। इसी में संविधान के अनुच्छेद 24 में स्पष्ट रूप से लिखा है कि 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चंे को किसी कारखानंे , खान या अन्य खतरनाक व्यवसाय में नही लगाया जा सकता जो उनके स्वास्थय पर विपरीत प्रभाव डालता हो (पाण्डेय डाॅ. जयनारायण 2008)। अधिनियम 2006 के अनुसार रेस्टोरेन्ट, होटलो, चाय की दुकानो ,रिसोर्टस, हेल्थ क्लब, घरेलु कामों में 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को नौकरी पर नही रखा जा सकता अगर रखता है, तो उसे 1 साल तक की कैद एंव बीस हजार रूपये तक का जुर्माना देना पडेगा इसके बाद भी आज 6 करोड बच्चें संकटपन उद्योगों में काम कर रहे है, जिनकी उम्र 5 से 14 वर्ष है। कृषि क्षेत्र में करीब 80 प्रतिशत् से भी अधिक बालश्रमिक जुडे है। युनीसेफ की रिर्पोट के अनुसार विश्व में अशिक्षित और बालश्रमिकों का सबसे बडा देश भारत ही है। (वाजपेयी डाॅ. दुर्गा 2009)। भारत सरकार की जनगणना 2011 के अनुसार 43 लाख 53 हजार बालश्रमिक अभी भी बालश्रम के रूप में कार्य कर रहे है,जिसमें उत्तरप्रदेश में 8 लाख, महाराष्ट्र में 4 लाख ,मध्यप्रदेश में 2 लाख ,राजस्थान में 2 लाख ,पश्चिम बंगाल में 2 लाख तथा छ.ग में 63 हजार बालश्रमिक है, इसके आलावा देश के अन्य राज्यांे में भी बालश्रमिक है।

 

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (छैव्) द्वारा किये गय सर्वे में 2004-2005 में असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले श्रमिकों की संख्या 43.3 करोड़ यानि कुल रोजगार का 93 प्रतिशत् है, जिसमें बच्चों की संख्या 2004-05 में 90.75 लाख थी जो 2009-2010 के सर्वे में घटकर 49.84 लाख होे गई है (श्रम एंव रोजगार मंत्रालय )। मानव विकास रिपोर्ट 2011 के अनुसार भारत में 50 लाख बच्चें काम कर रहे है (मानव विकास रिपोर्ट)। वही गैर सरकारी संगठनों के अनुसार कम से कम 6 करोड बच्चें बाल मजदूरी करते है (दैनिक भास्कर 2014 )। रोजगार मंत्री नरेन्द्र सिहं तोमर ने भी यह कहा है, की देश में 5 से 14 वर्ष के आयु वर्ग काम काजी बच्चों कि संख्या में गिरावट हुई है। देश में कामकाजी बच्चों की संख्या 2001 कि जनगणना के अनुसार 1.26 करोड थी जो 2011 कि जनगणना में घटकर 43.53 लाख रह गई है (हरिभूमि 2014)। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 45 मंे इस बात का उल्लेख है, कि 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को सरकार द्वारा निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। यद्यपि अनुच्छेद 39 (ड) बालकांे की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग न हो और आर्थिक आवश्यकता से मजबूर होकर उन्हे ऐसे रोजगार में ना जाना पडें जो उनकी आयु व शक्ति के अनुकुल न हो, इसी तरह अनुच्छेद 39 (च) बालकांे की शोषण से रक्षा करता हैं (पाण्डेय डाॅ. जगनारायण 2012)। गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण, अशिक्षा, और बडती जनसंख्या ये  प्रमुख रूप से बालश्रम होने के कारण है। गहराई से यदि विचार किया जाय तो बाल मजदूरी की समस्या उन परिवारों के बच्चों में अधिक पायंेगे जो कि गरीब है, या उनके व्यस्क या कमाऊ माता ,पिता बीमार है, या शारीरिक रूप से असक्षम है। वही पर कुछ बाल मजदूरों का मजदूरी करने का कारण यह है, कि सिर्फ परिवार के एक सदस्य के कमाने से घर नही चल पाता अतः मजबूरी वश उन्हे भी काम पर जाना पडता है। कुछ गरीब माता पिता मकान बनाने, बीमारी या शादी ब्याह हेतु सेठ साहूकारों से कर्ज लेते है, जिसे चुकाने में असमर्थ होने पर अपने बच्चों को भी मजदूरी करने पर भेज देते है। (भौमिक अभिजित 2008)। वास्तव में गरीबी को धीरे - धीरे समाप्त कर आर्थिक वृद्वि, रोजगार के अवसरों में वृद्वि, निवेश, आय का बेहतर वितरण, विश्व अर्थव्यवस्था में परिवर्तन, सरकारी बजट में बेहतर आबंटन और सहायता प्रभाव के बेहतर प्रबंध द्वारा गरीबी को समाप्त कर बाल मजदूरी की समस्या को भी समाप्त किया जा सकता है (कुजूर निस्तार 2006)

 

उद्देश्य:-

1. बालश्रमिकों के शिक्षा की स्थिति को जानना।

2.  बालश्रमिकों के कार्य के घण्टों का अध्ययन करना।      

3.बालश्रमिकांे के परिवारों को आय स्तर कि जानकारी प्रदान करना ।

 

परिकल्पनाः-

1.  अंसगठित शहरी क्षेत्रों में अधिकांश बाल श्रमिक अशिक्षित है।

2.  अंसगठित शहरी क्षेत्र में बालश्रमिकों के      

परिवारांे का आय स्तर निम्न है।

 

अध्ययन क्षेत्र:-

दुर्ग श्हर के अंसगठित क्षेत्र में कार्यरत् बालश्रमिकांे का चयन किया गया हैं:-

 

शोध प्रविधि:-

प्रस्तुत शोध प्रबंध प्राथमिक एंव द्वितीयक समंको पर आधारित है। आकडों के संकलन के लिए विस्तृत अनुसूची तैयार करके आकडों का संकलन किया गया है।

 

बाल श्रमिकों की आर्थिक एवं समाजिक स्थिति

1.  आयु:-

आयु का निर्धारण जन्म से होता है, आयु के अनुसार विभिन्न कार्यो को करने एवं न करने के कुछ नियम होते है। आयु का संबंध मानसिक परिपक्वता एवं अनुभव से होता है।

 

तालिका क्रमांक 1 आयु

क्रमांक     आयु वर्ग   स्ंाख्या    प्रतिशत्

1   6-8          28      8.75

2   9-11        109    34.06

3   12-14      183    57.19

योग       320    100

स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित

 

अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि 6 से 8 वर्ष के 8.75 प्रतिशत् बाल श्रमिक कार्य में संलग्न है 9-11 वर्ष के 34.06 प्रतिशत् जबकि 12-14 वर्ष के समूह में है जो कि 57.19 प्रतिशत् है।

 

2. शिक्षा:-

व्यक्ति के विकास के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण सीढ़ी का कार्य करती है बाल श्रमिकों में ज्यादातर बच्चें अशिक्षित रहते है या फिर प्राथमिक शिक्षा प्राप्त किए हुए ही पाये जाते है। शिक्षा के अभाव में विभिन्न व्यवसायों अथवा कार्यो में इनका अत्यधिक शोषण किया जाता है। 

 

तालिका क्रमांक 2 शिक्षा

क्रमांक     शिक्षा का स्तर    संख्या प्रतिशत्

1   प्राथमिक 116    36.25

2   माध्यमिक     44      13.75

3   अशिक्षित 160    50.00

योग       320    100

 स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित

शोध से यह भी प्रकट होती है। कि 50 प्रतिशत् बालश्रमिक अशिक्षित है, तथा 36.25 प्रतिशत् बाल श्रमिक बच्चें प्राथमिक विद्यालय तक पढ़े है जबकि 13.75 प्रतिशत् बाल-श्रमिक ने माध्यमिक शाला तक या पढ़ाई एवं कार्य साथ-साथ करते है।

 

3.  बालश्रमिकों के मकान की स्थिति:-

मानव की मूलभूत आवश्यकताओं में आवास भी एक है। किसी व्यक्ति के आवास को देखकर कोई भी व्यक्ति उस व्यक्ति के आर्थिक दशा के बारें में अनुमान लगा सकता है।

 

तालिका क्रमांक 3 मकानों की स्थिति

क्रमांक     मकानों की स्थिति संख्या प्रतिशत्

1   कच्चा मकान  213    66.56

2   पक्का मकान  63      19.69

3   झोपड़ी   44      13.75

योग       320    100

स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित

 

66.56 प्रतिशत् बालश्रमिक कच्चा मकानों में, 19.69 प्रतिशत् पक्का मकानों में, 13.75 प्रतिशत् झोपड़ी में निवास करते है।

 

4.मजदूरी की अवधी:-

बच्चें किस प्रकार का बालश्रम करते है। दैनिक, सप्ताहिक, या अन्य क्योंकि कभी-कभी परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाने के कारण माता-पिता की जगह काम पर जाने, स्कुल के अवकाश में काम करने के लिए बच्चे तैयार रहते है।

 

तालिका क्रमांक 4 मजदूरी की अवधी

क्रमांक     मजदूरी की अवधी संख्या प्रतिशत्

1   दैनिक   24      7.5

2   सप्ताहिक 131    40.94

3   मसिक   165    51.56

योग       320    100

स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित।

 

7.5 प्रतिशत् दैनिक मजदूरी करते है। 40.94 प्रतिशत् सप्ताहिक एवं 51.56 प्रतिशत् मासिक मजदूरी करते है।

5.  कार्य के घण्टे:-

बालश्रमिक जिनकी आयु खेलने खूदने की होती है। उन्हें लगातार कई घण्टों तक एक ही स्थिति में बैठकर कार्य करना पड़ता है। जिसके कारण उनके शारीरिक संरचना में परिवर्तन आने लगते हैं एवं एवं कई शारीरिक दोष दिखाई देने लगते है। यद्यपि उनके काम के घण्टे अधिक होते है।

 

तालिका क्रमांक 5 कार्य के घण्टे

क्रमांक     कार्य के घण्टे     संख्या प्रतिशत्

1   1-3          35      10.94

2   4-6          92      28.75

3   7-9          127    39.69

4   10-12      66      20.62

योग       320    100

स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित।

 

 

10.94 प्रतिशत् बालश्रमिक 1-3 घण्टे कार्य करते है। वही 28.75 प्रतिशत् बालश्रमिक 4-6 घण्टे काम करते है 7-9 घण्टे सर्वोधिक कार्य करते है। इसके अतिरिक्त 10-12 घण्टे भी 20.62 प्रतिशत् बालश्रमिक काम करते है।

 

6.  बालश्रमिकों की आय:-

बालश्रमिक छोटे उम्र में काम करते है। जिसके कारण उसकी मजदूरी दर निम्न होती है तथा मजदूरी दर निम्न होने के कारण उसका आय का स्तर भी निम्न रहता है।

 

 

तालिका क्रमांक 6 बालश्रमिकों की आय

क्रमांक     बालश्रमिकों की आय    संख्या प्रतिशत्

1   100-300  92      28.75

2   300-600  127    39.69

3   600-900  73      22.81

4   900-1200          28      8.75

योग       320    100

स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित।

 

28.75 प्रतिशत् बालश्रमिको की आय 100-300 तक है 39.69 प्रतिशत् बालश्रमिकों की आय 300-600 तक 22.81 प्रतिशत् बालश्रमिकों की आय 600-900 तक तथा 900-1200 तक आय प्राप्त करने वाले बालश्रमिकों की संख्या 8.75 प्रतिशत् है।

 

7.  बालश्रमिकों के परिवारों की आय:-

बालश्रमिकों के परिवारों की जो आय प्राप्त होता है। उसमें ज्यादातर बालश्रमिकों की आय शामिल रहते है। इनके परिवारों का आय बहुत ही कम होता है।

 

 

तालिका क्रमांक 7 बालश्रमिकों के परिवार की आय

क्रमांक     परिवारों की आय  संख्या प्रतिशत्

1   1000 रू. से कम    85      26.57

2   1000-2000        124    38.75

3   2000-3000        111    34.68

योग       320    100

स्त्रोतः- प्राथमिक सर्वे पर अधारित।

 

1000 रूपये से कम आय वाले परिवारों में 26.57 प्रतिशत् 1000-2000 आय प्राप्त करने वाले परिवारों की 38.75 प्रतिशत् तथा 34.68 प्रतिशत् परिवारों की आय 2000-3000 तक है, जो कि बहुत ही कम है।

8.  परिवार में प्रतिव्यक्ति औसत आयः- बालश्रमिकों के परिवारों में प्रति व्यक्ति आय बहुत ही कम है।

 

 

तालिका क्रमांक 8 प्रतिव्यक्ति औसत आय

क्रमांक         

1   परिवार की औसत आय    1877.97रूपये

2   प्रतिव्यक्ति औसत आय    300.96 रूपये

3   बालश्रमिकों की औसत आय 698.35 रूपये

4   परिवार की आय में बालश्रमिकों की आय 37.19 प्रतिशत्

 

परिवार की औसत मासिक आय 1877.97 रूपये मात्र ही है जबकि उनके परिवार के सदस्यों के अनुसार प्रतिव्यक्ति औसत आय मात्र 300.96 रू. मासिक होता है। बालश्रमिकों की औसत मासिक आय 698.35 रू. है परिवार की कुल आय में बाल श्रमिकों की आय की भागीदारी कुल का 37.19 प्रतिशत् है।

 

निष्कर्ष:-

1 सर्वोधिक बालश्रमिक 12-14 वर्ष के है।

2. अधिकांश बालश्रमिक अशिक्षित है।

3. कच्ची मकानों में सर्वाधिक बालश्रमिक निवास करते है।

4. अधिकांश बालश्रमिक को मासिक मजदूरी में संलग्न है।

5. बालश्रमिक सर्वाधिक 7 से 9 घंटे काम करते है।

6. बालश्रमिक माह में 300 से 600 तक कमा लेते है।

7. बालश्रमिक 1000 से 2000 आय समूह के परिवारों से है।

8. परिवार की कुल आय में बालश्रमिकों की आय सर्वाधिक होती है।

 

सुझाव:-

1.  परिवारिक निर्धनता बालश्रम का प्रमुख कारण है। अतः गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

2.  बालश्रम की रोकथाम हेतु सरकार द्वारा समय-समय पर जारी विभिन्न अधिनियमों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

3.  निःशुल्क बालश्रमिक विद्यालयों की स्थापना किया जाना चाहिए।

4.  बालश्रमिक को शिक्षा के साथ-साथ निःशुल्क व्यवसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए।

5.  अंसगठित क्षेत्र में कार्यरत् बालश्रमिकों को काम से हटाने के बाद उनके पुनर्वास के सार्थक प्रयास किऐ जाना चाहिए।

6.  बालश्रमिकों के परिवार के सदस्यों को रोजगार के इतने अवसर उपलब्ध कराए जाए की काम की कमी न रहे, तथा उन्हे इतनी मजदूरी दी जाए की अपने बच्चों की शिक्षा भी हो सकें, व उनकी न्युनतम अवश्यकताओं की पूर्ति भी कर सकें।

7.  स्वयंसेवी संस्थाऐं पत्रकार तथा जन संचार के माध्यमों को बालश्रम के कल्याणार्थ कार्यक्रम चलाने हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

 

स्ंदर्भ:-

1.  कुजूर निस्तार: बाल श्रम एक अभिशाप छत्तीसगढ इकोनामिक एसोसिऐशन सेकण्ड एनुअल कांफ्रेंस 18-20 2006. रायपुर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर छ.ग. पृष्ठ 11

2.  पाण्डेय डाॅ. जयनारायण भारत का संविधान 2008 सेन्ट्रल एजेन्सी 30-डी मोती लाल नेहरू रोड़ इलहाबाद पृष्ठ 344

3.  श्रीवास्तव मयंक बाल मजदूरी एक अनसुलझी समस्या योजना मई 2008 वर्ष 52 अंक 5 पृष्ठ 27

4.  वाजपेयी डां. दुर्गा बालश्रम एवं मानवधिकार शोध पत्रिका अवस.11 प्ैैन्म्.8  सितम्बर 2009 पृष्ठ 75

5.  भौमिक अभिजीत राष्ट्रीय समस्या अवस.11 प्ैैन्म्. 5  जनवरी 2009 पृष्ठ 669

6.  मानव विकास रिपोर्ट 2011 मानक पब्लिकेशन्स प्रा. लिमिटेड नई दिल्ली पृष्ठ 262

7.  पाण्डेय डां. जयनारायण भारत का संविधान 2012 सेन्ट्रल ला 30-डी मोती लाल नेहरू रोड़ इलहाबाद पृष्ठ 287

8.  हरिभूमि 24 जुलाई 2014

9.  दैनिक भास्कर 11 अक्टूबर 2014

10.     श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइड।

 

 

 

 

Received on 17.12.2015       Modified on 24.12.2015

Accepted on 31.12.2015      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 3(4): Oct. - Dec., 2015; Page 181-185